तालिबान : Taalibaan

■ तालिबान कट्टर धार्मिक विचारों से प्रेरित कबाइली लड़ाकों का एक संगठन है। इसके अधिकांश लड़ाके और कमांडर पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमा इलाकों में स्थित कट्टर धार्मिक संगठनों में पढ़े लोग, मौलवी और कबाइली गुटों के चीफ हैं। घोषित रूप में इनका एक ही मकसद है। पश्चिमी देशों का शासन से प्रभाव खत्म करना और देश में इस्लामी शरिया कानून की स्थापना करना। ■ तालिबान जिसे तालेबान के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में एक सुन्नी इस्लामिक आधारवादी आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। पश्तून में तालिबान का मतलब 'छात्र' होता है, एक तरह से यह उनकी शुरुआत मदरसों से जाहिर करता है। उत्तरी पाकिस्तान में सुन्नी इस्लाम का कट्टरपंथी रूप सिखाने वाले एक मदरसे में तालिबान के जन्म हुआ। ■ शीतयुद्ध के दौर में तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) को अफगानिस्तान से खदेड़ने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान के स्थानीय मुजाहिदीनों (शाब्दिक अर्थ - विधर्मियों से लड़ने वाले योद्धा) को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग के लिए उकसाया था। नतीजन, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन का जन्म हो ...

पेगासस स्पाईवेयर : Pegasus Spyware



■ हाल ही में 'वाशिंगटन पोस्ट' और भारत में समाचार पत्र 'द वायर' ने एक खबर प्रकाशित कर दावा किया है कि दुनियाभर के कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए और इसके लिए पेगासस (pegasus) स्पाईवेयर नामक एक निगरानी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया है।
■ लीक हुई इस निगरानी सूची में लगभग 40 भारतीय पत्रकारों के फोन नंबर पाए गए। इस सूची में किए गए फोरेंसिक परीक्षणों ने पुष्टि की है कि एक अज्ञात एजेंसी ने पेगासस सॉफ्टवेयर की मदद से उनमें से कुछ की सफलतापूर्वक जासूसी की है। सूची में कई भारतीय मंत्री, विपक्षी नेता, सरकारी अधिकारी और व्यवसायी भी शामिल हैं।
■ पेगासस एक स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर है, जिसे इज़रायली साइबर सुरक्षा कंपनी NSO द्वारा विकसित किया गया है। NSO का गठन 2009 में हुआ था। और ये अति उन्नत निगरानी टूल बनाती है। दुनिया के कई देशों की सरकारें इसकी ग्राहक हैं।
■ पेगासस स्पाईवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो उपयोगकर्ताओं के मोबाइल और कंप्यूटर से गोपनीय एवं व्यक्तिगत जानकारियाँ चोरी करता है एवं उन्हें नुकसान पहुंचाता है। इस तरह की जासूसी के लिए पेगासस ऑपरेटर एक खास लिंक उपयोगकर्ताओं के पास भेजता है, जिस पर क्लिक करते ही यह स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर, उपयोगकर्ताओं की स्वीकृति के बिना ही इंस्टॉल हो जाता है।
■ इस स्पाईवेयर के नए संस्करण में लिंक की भी आवश्यकता नहीं होती, यह सिर्फ एक मिस्ड वीडियो कॉल के द्वारा ही इंस्टॉल हो जाता है। पेगासस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होने के बाद पेगासस ऑपरेटर के फोन से जुड़ी सारी जानकारियाँ प्राप्त हो जाती हैं। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि यह पासवर्ड द्वारा रक्षित उपकरणों को भी निशाना बना सकता है और यह मोबाइल के रोमिंग में होने पर डेटा नहीं भेजता है।
■ पेगासस मोबाइल में संगृहीत सूचनाएं, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे कॉम्युनिकेशन एप के संदेश स्पाईवेयर ऑपरेटर को भेज सकता है। यह स्पाईवेयर, उपकरण कुल मेमोरी का 5 प्रतिशत से भी भाग उपयोग करता है, जिससे उपयोगकर्ता को इसके होने का आभास भी नहीं होता। यह ब्लैकबेरी, एंड्रॉयड, आईओएस (आईफ़ोन) और सिंबियन आधारित उपकरणों को प्रभावित कर सकता है।

Sudhanshu Mishra


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