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तालिबान : Taalibaan

■ तालिबान कट्टर धार्मिक विचारों से प्रेरित कबाइली लड़ाकों का एक संगठन है। इसके अधिकांश लड़ाके और कमांडर पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमा इलाकों में स्थित कट्टर धार्मिक संगठनों में पढ़े लोग, मौलवी और कबाइली गुटों के चीफ हैं। घोषित रूप में इनका एक ही मकसद है। पश्चिमी देशों का शासन से प्रभाव खत्म करना और देश में इस्लामी शरिया कानून की स्थापना करना। ■ तालिबान जिसे तालेबान के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में एक सुन्नी इस्लामिक आधारवादी आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। पश्तून में तालिबान का मतलब 'छात्र' होता है, एक तरह से यह उनकी शुरुआत मदरसों से जाहिर करता है। उत्तरी पाकिस्तान में सुन्नी इस्लाम का कट्टरपंथी रूप सिखाने वाले एक मदरसे में तालिबान के जन्म हुआ। ■ शीतयुद्ध के दौर में तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) को अफगानिस्तान से खदेड़ने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान के स्थानीय मुजाहिदीनों (शाब्दिक अर्थ - विधर्मियों से लड़ने वाले योद्धा) को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग के लिए उकसाया था। नतीजन, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन का जन्म हो ...

तालिबान : Taalibaan

■ तालिबान कट्टर धार्मिक विचारों से प्रेरित कबाइली लड़ाकों का एक संगठन है। इसके अधिकांश लड़ाके और कमांडर पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमा इलाकों में स्थित कट्टर धार्मिक संगठनों में पढ़े लोग, मौलवी और कबाइली गुटों के चीफ हैं। घोषित रूप में इनका एक ही मकसद है। पश्चिमी देशों का शासन से प्रभाव खत्म करना और देश में इस्लामी शरिया कानून की स्थापना करना। ■ तालिबान जिसे तालेबान के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में एक सुन्नी इस्लामिक आधारवादी आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। पश्तून में तालिबान का मतलब 'छात्र' होता है, एक तरह से यह उनकी शुरुआत मदरसों से जाहिर करता है। उत्तरी पाकिस्तान में सुन्नी इस्लाम का कट्टरपंथी रूप सिखाने वाले एक मदरसे में तालिबान के जन्म हुआ। ■ शीतयुद्ध के दौर में तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) को अफगानिस्तान से खदेड़ने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान के स्थानीय मुजाहिदीनों (शाब्दिक अर्थ - विधर्मियों से लड़ने वाले योद्धा) को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग के लिए उकसाया था। नतीजन, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन का जन्म हो ...

मिशन चंद्रयान-2 : Mission Chandrayaan-2

चंद्रयान-2 मिशन एक अत्यधिक जटिल मिशन है, जो इसरो के पिछले मिशनों की तुलना में एक महत्वपूर्ण तकनीकी छलांग का प्रतिनिधित्व करता है। यह चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव की खोज के लक्ष्य के साथ एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर को एक साथ ले जाएगा। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर बयालू और विक्रम लैंडर भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के साथ संचार करने में सक्षम है। सटीक प्रक्षेपण और मिशन प्रबंधन ने नियोजित एक वर्ष के बजाय लगभग सात वर्षों का एक मिशन जीवन सुनिश्चित किया है। चंद्रयान-2 के लैंडर का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। यह एक चंद्र दिवस के लिए कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो पृथ्वी के लगभग 14 दिनों के बराबर है। चंद्रयान-2 का रोवर प्रज्ञान नाम का है, जो एक 6-पहिए वाला रोबोट वाहन होगा। Sudhanshu Mishra

एसिड से समुद्री जीवों का अस्तित्व खतरे में : Acid Threatens The Existence Of Marine Organisms

हमारी पृथ्वी का बड़ा भाग समुद्र से घिरा हुआ है। जिसमें नाना प्रकार की प्रजातियाँ निवास करती हैं। यदि इन जीवों पर खतरा आया, तो हमारा अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। सारे समुद्रों में एसिड का स्तर अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है और संभव है कि इस समय पिछले 30 करोड़ वर्षों में सबसे अधिक हो। वैज्ञानिकों का आकलन है कि एसिड के स्तर के बढ़ने की यह प्रक्रिया वर्ष 2100 तक 120 प्रतिशत तक हो सकती है।         उनका मानना है कि इन परिस्थितियों में 30 प्रतिशत समुद्री प्रजातियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि इसके लिए मनुष्यों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। वर्ष 2100 में जिस तरह एसिड का स्तर बढ़ने की संभावना है, उसमें कोई भी मोलस्का जिंदा नहीं रह सकता। यह निश्चित रूप से बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। इस मुद्दे पर दुनिया के 500 से ज्यादा जाने-माने विशेषज्ञ कैलिफोर्निया में जुटे थे।         इंटरनेशनल बायोस्फेयर-जीयोस्फेयर कार्यक्रम की अगुआई में हुए अध्ययन की रिपोर्ट प्रकाशित कर दी गई है। इसमें कहा गया ...

अलाउद्दीन खिलजी : प्रशासनिक एवं आर्थिक दृष्टि Alauddin khilji : Administrative And Economic Vision

■ अलाउद्दीन खिलजी एक दूरदर्शी राजनीतिज्ञ, व्यवहारिक राजनेता तथा महान प्रशासक था। उसने अपने शासन के पूर्व प्रचलित शासन व्यवस्था का बारीकी से मूल्यांकन किया और इसमें व्यापक सुधार किए। अलाउद्दीन का विश्वास था कि राजस्व का विकास पूर्णनिष्ठा के बिना संभव नहीं है, परंतु उसके राज्य में विद्रोह की समस्या बनी हुई थी। इस समस्या पर काबू पाने के लिए अलाउद्दीन ने विद्रोह संबंधी कारणों को जानने और विद्रोहों का समाधान करने का प्रयास किया। ■ उसके समय विद्रोह के चार कारण थे- 1- प्रजा के बीच एक धनी और उदण्ड वर्ग मौजूद था, जो बराबर सुल्तान की सत्ता को चुनौती देता था, इस वर्ग के रूप में अलाउद्दीन ने मध्यस्थ भूमिपतियों को दोषी ठहराया। 2- सामंत वर्ग में शक्तिशाली परिवारों के बीच वैवाहिक संबंध आदि से उनकी शक्ति में वृद्धि होती थी और वे सुल्तान को चुनौती देने के के लिए प्रेरित होते थे। 3- सुल्तान को अपने राज्य में घटित होने वाली सूचनाओं की पूरी जानकारी नहीं रहती थी, अतः षड्यंत्र और विद्रोह होते रहते थे। 4- राजधानी में त्योहारों एवं उत्सवों के अवसर पर मदिरापान होता था, जिससे षड्यंत्रकारी द्वारा लोगों को बहक...

"खुर्दा संग्राम - एक केस स्टडी" या पाइक विद्रोह : khurda Uprising - A Case Study Or Paika Rebellion

■ 1857 की एक घटना से बहुत पहले, उसी प्रकार की एक घटना सन 1817 में खुर्दा नामक स्थान पर घटित हुई थी। इस घटना के अध्ययन से यह पता चलता है कि कैसे अंग्रेजों की औपनिवेशिक नीतियों के खिलाफ 19वीं सदी की शुरुआत से ही देश के विभिन्न हिस्सों में असंतोष निर्मित होने लगा था। ■ खुर्दा, जो कि ओडिसा के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित एक छोटा सा राज्य था, वह 19वीं शताब्दी की शुरुआत में 105 गढ़ों, जिनमें 60 बड़े और 1109 छोटे गांव सम्मिलित थे। यह एक जनबहुल उपजाऊ क्षेत्र था। इसके शासक, राजा बीरकिशोर देव को स्व अधिकृत चार परगनाओं को तथा जगन्नाथ मंदिर के संचालन अधिकार समेत 14 गढ़जातों के प्रशासनिक उत्तरदायित्व को पूर्व में दबाव में आकर मराठाओं को सौंप देना पड़ा था। उनके पुत्र तथा उत्तराधिकारी, मुकुंद देव द्वितीय इस दुर्दशा से विचलित थे। अतः अंग्रेजों और मराठों के बीच जारी संघर्ष में अपने लिए एक मौका देखते हुए उन्होंने अपने खोए हुए क्षेत्रों तथा जगन्नाथ मंदिर की देखरेख से संबंधित अधिकारों की पुनः प्राप्ति हेतु अंग्रेजों के साथ सलाह मशवरा शुरू कर दिया था। परंतु 1803 में ओडिसा को अपने कब्जे में लेने के बाद अंग्रेजों...

छत्रपति शिवाजी महाराज : Chhatrapati Shivaji Maharaj

6 जून 2021 को मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस की वर्षगाँठ के अवसर पर गोवा सरकार ने एक लघु फ़िल्म जारी की है। छत्रपति शिवाजी महाराज के विषय में ■ शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 को वर्तमान महाराष्ट्र राज्य में पुणे जिले के शिवनेरी किले में हुआ था। ■ शिवजी का जन्म एक मराठा सेनापति शाहजी भोंसले के घर हुआ था। जिन्होंने बीजापुर सल्तनत के तहत पुणे एवं सुपे की जागीरें प्राप्त की थीं।  ■ शिवजी के जीवन पर उनकी माता जीजाबाई के धार्मिक गुणों का गहरा प्रभाव था। माता जीजाबाई एक धर्मपरायण महिला थीं। प्रारंभिक जीवन ■ वर्ष 1645 में किशोरावस्था में पहली बार शिवाजी ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया जिसके परिणामस्वरूप बीजापुर के अधीन तोरण किले पर सफलतापूर्वक नियंत्रण प्राप्त कर लिया था। ■ इन्होंने कोंढाना किले पर भी अधिकार किया। ये दोनों किले (तोरण और कोंढाना) बीजापुर के आदिल शाह के अधीन थे। महत्वपूर्ण युद्ध ■ प्रतापगढ़ का युद्ध, 1659: यह युद्ध मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज और आदिलशाही सेनापति अफजल खान की सेनाओं के बीच महाराष्ट्र के सतारा शहर के पास प्रतापगढ़ के किले में लड़ा गय...

अरब में इस्लाम धर्म की स्थापना और कुरान का एक अंश

■ मरुभूमि होते हुए भी सदियों से अरब, यातायात का एक बड़ा केंद्र था। दरअसल, अरब व्यापारी तथा नाविकों ने भारत और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अरब में रहने वाले अन्य लोगों में बेदुइन थे, जो घुमक्कड़ कबीले होते थे। ये मुख्य रूप से ऊँटों पर आश्रित होते थे। क्योंकि यह एक ऐसा मजबूत जानवर है, जो मरुभूमि में भी स्वस्थ रह सकता है। ■ लगभग 1400 साल पहले पैगम्बर मुहम्मद ने अरब में इस्लाम नामक एक नए धर्म की शुरुआत की। ईसाई धर्म की तरह इस्लाम ने भी अल्लाह को सर्वोपरि माना है, उनके बाद सभी को समान माना गया है। यहाँ इस्लाम धर्म के पवित्र ग्रंथ कुरान का एक अंश दिया गया है:       " मुसलमान स्त्रियों और पुरुषों के लिए, विश्वास रखने वाले स्त्रियों और पुरुषों के लिए, भक्त स्त्रियों और पुरुषों के लिए, सच्चे स्त्रियों और पुरुषों के लिए, धैर्यवान और स्थिर मन के स्त्रियों और पुरुषों के लिए, दान देने वाले स्त्रियों और पुरुषों के लिए, उपवास रखने वाले स्त्रियों और पुरुषों के लिए, अपनी पवित्रता बनाए रखने वाले स्त्रियों और पुरुषों के लिए, अल्लाह को हमेशा याद क...

पेगासस स्पाईवेयर : Pegasus Spyware

■ हाल ही में 'वाशिंगटन पोस्ट' और भारत में समाचार पत्र 'द वायर' ने एक खबर प्रकाशित कर दावा किया है कि दुनियाभर के कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए और इसके लिए पेगासस (pegasus) स्पाईवेयर नामक एक निगरानी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया है। ■ लीक हुई इस निगरानी सूची में लगभग 40 भारतीय पत्रकारों के फोन नंबर पाए गए। इस सूची में किए गए फोरेंसिक परीक्षणों ने पुष्टि की है कि एक अज्ञात एजेंसी ने पेगासस सॉफ्टवेयर की मदद से उनमें से कुछ की सफलतापूर्वक जासूसी की है। सूची में कई भारतीय मंत्री, विपक्षी नेता, सरकारी अधिकारी और व्यवसायी भी शामिल हैं। ■ पेगासस एक स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर है, जिसे इज़रायली साइबर सुरक्षा कंपनी NSO द्वारा विकसित किया गया है। NSO का गठन 2009 में हुआ था। और ये अति उन्नत निगरानी टूल बनाती है। दुनिया के कई देशों की सरकारें इसकी ग्राहक हैं। ■ पेगासस स्पाईवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो उपयोगकर्ताओं के मोबाइल और कंप्यूटर से गोपनीय एवं व्यक्तिगत जानकारियाँ चोरी करता है एवं उन्हें नुकसान पहुंचाता है। इस तरह की जासूसी के लिए पेगासस ऑपरेटर एक खास लिंक उपयोगकर...

NCERT History Class-8 Chapter-6 उपनिवेशवाद और शहर, एक शाही राजधानी की कहानी। Summary

औपनिवेशिक शासन में शहरों की दशा ■ ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के बाद गाँवों का जीवन बदल गया था और इसी समय शहरों में क्या हो रहा था? इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह के क़स्बे या शहर की चर्चा की जा रही है। मदुरै जैसे मंदिरों के शहर का इतिहास ढाका जैसे उत्पादन शहरों या सूरत जैसे बंदरगाह या एक साथ कई तरह के काम करने वाले क़स्बों से बिल्कुल अलग मिलेगा। ■ पश्चिमी विश्व के ज्यादातर भागों में आधुनिक शहर औद्योगीकरण के साथ सामने आए थे। ब्रिटेन में लीड्स और मैनचेस्टर जैसे औद्योगिक शहर उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में तेज़ी से फैले क्योंकि बहुत सारे लोग नौकरी, मकान और अन्य सुविधाओं की उम्मीद में इन शहरों की तरफ आ रहे थे। लेकिन, उन्नीसवीं सदी में भारतीय शहर पश्चिम यूरोप के शहरों की तरह तेज़ी से नहीं फैले। ■ अठारहवीं सदी के आखिर में कलकत्ता, बम्बई और मद्रास का महत्व प्रेजिडेंसी शहरों के रूप में तेज़ी से बढ़ रहा था। ये शहर भारत में ब्रिटिश सत्ता के केंद्र बन गए थे। उसी समय बहुत सारे दूसरे शहर कमज़ोर पड़ते जा रहे थे। ख़ास चीजों के उत्पादन वाले बहुत सारे शहर इसलिए पिछड़ने लगे क्योंकि वहाँ जो चीजें बनती...

यूरोप का एक शहर रोम

रोम यूरोप के सबसे पुराने शहरों में से एक है। इसका विकास लगभग तभी हुआ, जब गंगा के मैदान के शहर बस रहे थे। रोम एक बहुत बड़े साम्राज्य की राजधानी था। यह यूरोप, उत्तरी अफ्रीका तथा पश्चिमी एशिया तक फैला साम्राज्य था। इसके महत्वपूर्ण शासकों में से एक ऑगस्टस ने करीब 2000 साल पहले शासन किया था। उसने कहा था कि रोम ईंटो का शहर था, जिसे मैंने संगमरमर के बनवाया। ऑगस्टस और उसके बाद के शासकों ने कई मंदिर तथा महल भी बनवाए। ऑगस्टस ने बड़े-बड़े रंगमंडल (एम्फीथिएटर) बनवाए। इनमें चारो तरफ दर्शकों के बैठने की सीढ़ीनुमा जगहें होती थी। यहां लोग विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम देख सकते थे। उन्होंने स्नानागार भी बनवाए जहाँ स्त्रियों तथा पुरुषों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित थे। यहाँ लोग एक-दूसरे से मिलते थे, और आराम करते थे। बड़े-बड़े जलवाही सेतु, एक्वाडक्ट, के जरिये शहर के स्नानागारों , फव्वारों तथा गुसलखानों के लिए पानी लाया जाता था। Sudhanshu Mishra

चीन की दीवार

मौर्य साम्राज्य के उभरने से थोड़ा पहले लगभग 2400 वर्ष पहले, चीन में सम्राटों ने चीन की दीवार का निर्माण शुरू किया। इसे बनाने का उद्देश्य उत्तरी सीमा की पशुपालक लोगों से रक्षा करना था। अगले 2000 वर्षों तक इस दीवार का निर्माण कार्य चलता रहा, क्योंकि साम्राज्य की सीमाएँ बदलती रहीं। यह दीवार लगभग 6400 किलोमीटर लंबी है तथा पत्थर और ईंट से बनी है। इसकी ऊपरी सतह सड़क जैसी चौड़ी है। इस दीवार को बनाने के लिए हजारों लोगों को काम करना पड़ा। हर 100-200 मीटर की दूरी पर इस पर निगरानी के लिए बुर्ज बने हुए हैं। Sudhanshu Mishra

एथेन्स 2500 साल पहले

■ लगभग 2500 साल पहले एथेन्स के लोगों ने शासन व्यवस्था की स्थापना की, जिसे प्रजातंत्र या गणतंत्र कहते हैं। ■ यह व्यवस्था लगभग 200 सालों तक चली। इसमें 30 साल से ऊपर के उन सभी पुरुषों को पूर्ण नागरिकता प्राप्त थी जो दास नहीं थे। वहाँ एक सभा थी जो महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने के लिए साल भर में कम से कम 40 बार बुलाई जाती थी। ■ इस सभा में सभी नागरिक भाग ले सकते थे। ■ शासन के कई पदों पर नियुक्तियाँ लॉटरियों द्वारा की जाती थीं। सभी नागरिकों को सेना और नौसेना में अपनी सेवाएं देनी होती थीं। ■ औरतों को नागरिक का दर्जा नहीं मिलता था। ■ व्यापारियों तथा शिल्पकारों के रूप में एथेन्स में रहने और काम करने वाले बहुत से विदेशियों को भी नागरिक अधिकार नहीं मिले थे। एथेन्स में खदानों, खेतों, घरों और कार्यशालाओं में काम कर रहे दासों को भी नागरिक अधिकार नहीं मिले थे। Sudhanshu Mishra

आश्रम-व्यवस्था

■ जैन और बौद्ध धर्म जिस समय लोकप्रिय हो रहे थे लगभग उसी समय ब्राह्मणों ने आश्रम-व्यवस्था का विकास किया। ■ यहाँ आश्रम शब्द का तात्पर्य लोगों द्वारा रहने तथा ध्यान करने के लिए प्रयोग में आने वाले स्थान से नहीं है, बल्कि इसका तात्पर्य जीवन के एक चरण से है।  ■ ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ तथा संन्यास नामक चार आश्रमों की व्यवस्था की गई। ■ ब्रह्मचर्य का अंतर्गत ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य से यह अपेक्षा की जाती थी कि इस चरण के दौरान वे सादा जीवन बिताकर वेदों का अध्ययन करेंगे। ■ गृहस्थ आश्रम के अंतर्गत उन्हें विवाह कर एक गृहस्थ के रूप में रहना होता था। वानप्रस्थ के अंतर्गत उन्हें जंगल में रहकर साधना करनी थी। अंततः उन्हें सब कुछ त्यागकर संन्यासी बन जाना था। ■ आश्रम व्यवस्था ने लोगों को अपने जीवन का कुछ हिस्सा ध्यान में लगाने पर जोर दिया। ■ प्रायः स्त्रियों को वेद पढ़ने की अनुमति नहीं थी और उन्हें अपने पतियों द्वारा पालन किए जाने वाले आश्रमों का ही अनुसरण करना होता था। Sudhanshu Mishra

चीन की लेखन कला का सबसे पुराना उदाहरण

■ लगभग 3500 साल पहले चीन की लेखन कला के सबसे पुराने उदाहरण मिलते हैं। ■ यह जानवरों की हड्डियों पर लिखे गए थे। इन्हें भविष्यवाणी करने वाली हड्डियाँ कहा जाता है, क्योंकि यह मान्यता थी कि ये भविष्य बताती हैं। राजा लोग लिपिकारों से इन हड्डियों पर सवाल लिखवाते थे। जैसे - क्या वे युद्ध जीतेंगे? क्या फसलें अच्छी होंगी? क्या उन्हें पुत्र होंगे? फिर इन हड्डियों को आग में डाल दिया जाता था। जहाँ इनमें गर्मी से चटक कर दरारें पड़ जाती थीं। भविष्यवक्ता इन दरारों को बड़े ध्यान से देखकर भविष्यवाणी करने की कोशिश करते थे। ये भविष्यवक्ता कभी-कभी गलती भी करते थे। ■ ये राजा शहरों में महल बनाकर रहते थे। उन्होंने बेशुमार दौलत इकट्ठी कर ली थी, जिनमें बड़े-बड़े नक्काशी किए हुए काँसे के बर्तन शामिल थे। लेकिन वे लोहे का इस्तेमाल करना नहीं जानते थे। Sudhanshu Mishra

मिस्र के पिरामिड

■ नील नदी के आसपास वाले इलाकों को छोड़कर मिस्र के अधिकांश भाग रेगिस्तान है। ■ लगभग 5000 साल पहले मिस्र में शासन करने वाले राजाओं ने सोना, चांदी, हाथीदाँत, लकड़ी और हीरे-जवाहरात लाने के लिए अपनी सेनाएँ दूर-दूर तक भेजीं। इन्होंने बड़े-बड़े मकबरे बनवाए जिन्हें 'पिरामिड' के नाम से जाना जाता है। ■ राजाओं के मरने पर उनके शवों को इन्हीं पिरामिडों में दफ़नाकर सुरक्षित रखा जाता था। इन शवों को ममी कहा जाता है। उनके शवों के साथ और भी अनेक चीजें दफनायी जाती थीं। इनमें खाद्यान्न, पेय, वस्त्र गहने, बर्तन, वाद्ययंत्र, हथियार और जानवर शामिल हैं। कभी-कभी शव के साथ उनके सेवक और सेविकाओं को भी दफ़ना दिया जाता था। दुनिया के इतिहास में शवों को दफनाने की परंपरा को देखते हुए मिस्र में सबसे ज़्यादा धन-दौलत खर्च किया जाता था। Sudhanshu Mishra

फ्रांस का एक पुरास्थल

■इस पुरास्थल की खोज लगभग 100 साल पहले चार स्कूली छात्रों ने की थी। यहां जो चित्र मिलेे हैैं, इस तरह के चित्र लगभग 20000 साल पहले से लेकर 10000 साल पहले के बीच बनाए गए होंगे। इनमें कई जानवरों के चित्र हैं। इनमें जंगली घोड़े, गाय, भैंस, गैंडा, रेनडियर, बारहसिंघा और सूअरों को गहरे-चमकीले रंगों से चित्रित किया गया है। ■ इनके रंगों को लौह-अयस्क और चारकोल जैसे खनिज पदार्थों से बनाया जाता था। यह संभव है कि इन चित्रों को उत्सवों के अवसर पर बनाया जाता था या फिर इन्हें शिकारियों द्वारा शिकार पर निकलने से पहले कुछ अनुष्ठानों के लिए बनाया गया होगा। Sudhanshu Mishra

मिस्र से मिले एक पत्थर में अभिलेखित अज्ञात लिपि की पहचान

अज्ञात लिपि को जानने के लिए एक प्रसिद्ध कहानी उत्तरी अफ्रीकी देश मिस्र से मिलती है। लगभग 5000 वर्ष पूर्व यहाँ राजा रानी रहते थे। मिस्र के उत्तरी तट पर रोसो नाम का एक कस्बा है। यहाँ से एक ऐसा उत्कीर्णित (अभिलेखित) पत्थर मिला है जिस पर एक ही लेख तीन भिन्न-भिन्न भाषाओं तथा लिपियों में उपलब्ध है जिसमें यूनानी लिपि एवं मिस्री लिपि के दो प्रकार शामिल हैं। कुछ विद्वान यूनानी भाषा पढ़ सकते थे। इसके बाद विद्वानों ने यूनानी तथा मिस्री संकेतों को अगल-बगल रखते हुए मिस्री अक्षरों की समानार्थक ध्वनियों की पहचान की। यहाँ एल (L) अक्षर के लिए शेर तथा ए (A) अक्षर के लिए चिड़िया के चित्र बनाए गए थे। एक बार, जब उन्होंने यह जान लिया कि विभिन्न अक्षर किनके लिए प्रयुक्त हुए हैं, तो वे आसानी से अन्य अभिलेखों को भी पढ़ सके। Sudhanshu Mishra

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